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बंगलोर हाई कोर्ट द्वारा सीसीआई की अमेज़न को स्टे देने के खिलाफ कैट करेगा अपील

कर्नाटक हाई कोर्ट ने सीसीआई द्वारा अमेज़न के खिलाफ जांच के आदेश को आज इस आधार पर रोक दिया है कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने पहले ही फ्लिपकार्ट और अमेज़ॅन की गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है जो एफडीआई नीति के उल्लंघन में होने के आरोप के सम्बन्ध में चल रही है । न्यायालय ने सीसीआई बनाम भारती एयरटेल मामले के निर्णय को आधार बनाते हुए अमेज़न की याचिका पर स्टे दिया है ! हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया है कि जबकि सीसीआई ने अमेज़न से पिछले मामले में टिप्पणी मांगी थी इस दृष्टि से सीसीआई को वर्तमान मामले में पक्षकारों को भी बुलाना चाहिए था !

कैट और दिल्ली व्यापर महासंघ दोनों ने बहुत जल्द उच्च न्यायालय के आज के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने का फैसला किया है और दोनों इस मामले में अपने-अपने वकीलों से सलाह ले रहे हैं। इस बीच कैट केंद्र सरकार से एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की जाँच में तेजी लाने पर जोर देगा ! इस संदर्भ में कैट का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीथारमन से मुलाकात करेगा।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ सीसीआई जांच को रोकने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के उद्देश को “दुर्भाग्यपूर्ण और अप्रत्याशित” करार दिया। ईडी की जांच और सीसीआई जांच के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करके अमेज़ॅन के वकीलों ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है ! अमेज़न का एकमात्र मकसद सीसीआई जांच को रोकना था जिससे उनके अनैतिक व्यापार प्रथाओं के उजागर होने का डर था ! हालाँकि न्यायालय ने स्वीकार किया कि प्रवर्तन निदेशालय को एफडीआई उल्लंघन के लिए इन कंपनियों के खिलाफ जांच जारी रखनी चाहिए। कैट अब सरकार को इन कंपनियों की कुप्रथाओं को उजागर करने के लिए ईडी की जांच में तेजी लाने के लिए जोर देगी और मामले में बहुत जल्द अपील भी दायर करेगी।

श्री खंडेलवाल ने दोहराया कि यदि अमेज़ॅन ईमानदार व्यवसाय कर रहा है और किसी भी उल्लंघन या अनैतिक व्यापारिक प्रथा में लिप्त नहीं है, तो यह एक वैश्विक इकाई के रूप में जांच का सामना करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी लेकिन अमेज़न ने जांच का सामना करने से इंकार करके सभी के मन में और अधिक संदेह पैदा कर दिया है, जिसमें उसके कर्मचारी, हितधारक, प्राधिकरण और उपभोक्ता भी शामिल हैं, कि इतने बड़े संगठन ने जांच से दूर भागने की हर संभव कोशिश क्यों की।

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