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लड़की और अजगर’ वाली कहानी आज पुनः प्रासंगिक हो गई है : मनोज खत्री

आपने ‘लड़की और अजगर’ वाली वो कहानी तो सुनी ही होगी! ये कहानी आज पुनः प्रासंगिक हो गई है।

विदेश में कहीं एक लड़की ने एक अजगर का बच्चा पाल लिया था। वो उसका ख़ूब ध्यान रखती थी, खिलाती-पिलाती थी। उसको खूब प्यार करती, उसके साथ खेलती, उसी के साथ सोती भी थी।

लेकिन एक दिन वह अजगर बीमार पड़ गया। लड़की उसको लेकर भागी-भागी डॉक्टर के पास पहुँची। डॉक्टर ने पूछा, “तुम्हें कैसे पता चला कि यह बीमार है?”

लड़की ने बताया कि पहले तो यह मेरे साथ खूब खेलता था, बड़े मन से खाता-पीता था, लेकिन अब यह अजीब सा व्यवहार करने लगा है। अब यह सुस्त रहता है, और जब रात में मेरे साथ सोता है तो भी इसके शरीर में इतनी ऐंठन होती है कि इसका पूरा शरीर अकड़ कर लम्बा सा तन जाता है। मुझे बहुत दुःख होता है इसकी परेशानी देखकर।”

डॉक्टर ने मुस्कुरा कर बताया कि, “इस अजगर को कोई समस्या या बीमारी नहीं है। जब तक यह छोटा था, तब तक कुछ समझता नहीं था, इसलिए तुम्हारे साथ खेलता था। अब यह बड़ा हो रहा है, तो इसको यह बात समझ आ गई है कि तुम इसका खिलौना नहीं, बल्कि ‘आहार’ हो। यह रात में जो अपना शरीर तानता है, यह देखने की कोशिश करता है कि अभी इतना बड़ा हुआ कि नहीं, कि तुम्हें निगल सके। जिस दिन इसको समझ आ गया कि यह पर्याप्त बड़ा हो गया है, यह तुम्हें सोते में ही पूरा निगल जाएगा। यही अजगर की प्रकृति होती है, तुम कितना भी प्यार दिखा लो, एक दिन यह तुमको निगल ही जाएगा।”

डॉक्टर की बात सुनकर लड़की मारे डर के थर-थर काँपने लगी। उसने तुरन्त उस अजगर को जंगलों में फिंकवा दिया।

ये जो दिल्ली के शाहीन बाग से CAA और NRC के विरोध के नाम पर नंगा नाच चल रहा है, आपको क्या लगता है कि इन्हें पता नहीं है कि इस कानून से इन्हें कोई ख़तरा नहीं है? पता है इनको, उसके बाद भी रोज़ एक से एक विडियो आ रहे हैं जिसमें छोटे-छोटे बच्चे, लड़कियाँ, औरतें आदि यह कहती नज़र आ रही हैं कि,”हँस कर लिया था पाकिस्तान, लड़ कर लेंगे हिन्दुस्तान!”

आपको क्या लगता है? यह सारे भटके हुए हैं? तो फिर इनके कबीले में सुधरा हुआ कौन है?

वो शर्जील खुलेआम कहता पाया गया है कि, “भाइयों, हिन्दुस्तान के हर बड़े शहर में चक्का जाम करके अपनी ताकत दिखा दो। असम की रेलवे लाइनों पर इतना मलबा डाल दो कि सरकार को मलबा हटाने में महीनों लग जाएँ। इसी बीच पूर्वोत्तर हिन्दुस्तान को “चिकन नेक” की तरह बाकी हिस्सों से काट कर कब्ज़ा कर लो।”

क्या है यह सब? ये सब देखकर आपको कुछ समझ आ रहा है कि आपके ही देश में आपका क्या भविष्य होने वाला है?

आप वही ‘सेकुलर लड़की’ हैं, जो इनके साथ गलबहियाँ करते हुए भाईचारे के गीत गाते फिरते हैं। गंगा-जमुनी तहज़ीब और बिरयानी पर लार चुआते घूमते हैं। और ये लोग वही अजगर के बच्चे हैं। ये आन्दोलन नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी ताकत खींच कर, बढ़ा कर, यह चेक कर रहे हैं कि, “क्या ये इतने लम्बे हो गए हैं कि तुम्हारे हिन्दुस्तान के साथ तुम्हें भी समूचे निगल जाएँ?”

किसी भुलावे या गफ़लत में मत रहिएगा। ये लोग अभी कुछ समय पहले ही इसी तरह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश समूचा निगल चुके हैं। महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मणों से लेकर कश्मीर के पंडितों का हाल भी अभी ताज़ा ही है। सदियों पहले ‘हिन्दुओं का नरसंहार करने वाले आततायी की तलवार’ की देखरेख करते हुए केरल में यही लोग कह रहे हैं कि, “हमने वो तलवार अभी समन्दर में नहीं फेंकी है। अभी भी उस पर धार लगाई जा रही है।”

“गज़वा ए हिन्द” आपके लिए मज़ाक की बात होगी, आप सोचते होंगे कि ‘कट्टर हिन्दुओं’ की यह चाल है।

लेकिन ये लोग इसी सपने को रोज़ाना दिन में पाँच बार हिल हिल कर रटते हैं। न भरोसा हो, तो गूगल में “गज़वा ए हिन्द” सर्च करके देख लीजिए एक बार।

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