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नागरिकता संशोधन कानून का भारत में जन्में देश के मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं है – मनोज तिवारी

नई दिल्ली, 20 दिसंबर। भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने आज सेन्ट्रल पार्क कनाॅट प्लेस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा को नागरिक संशोधन कानून पर बहस करने व भ्रांतियों को दूर करने के लिए मीडिया व स्थानीय लोगों के सम्मुख आने के लिए आमंत्रित किया था जहां पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के मुखिया नहीं आये। नागरिक संशोधन कानून पर भ्रम की स्थिति को दिल्ली की जनता के बीच से दूर करने के लिए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने तथ्यों के साथ अपनी बात मीडिया और उपस्थित लोगों के सम्मुख रखी।

पत्रकारों व स्थानीय लोगों को सम्बोधित करते हुये दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने कहा कि नागरिक संशोधन कानून को लेकर बहस चल रही है देश में अफवाह ज्यादा हावी है। अफवाहों का कोई आधार नहीं होता है, लेकिन उसको खड़ा कर दिया जाता है और वो तेजी से फैलती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री को और दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष को पत्र लिखा गया, फोन के माध्यम से सूचित किया गया है और बहस के लिए आमंत्रित किया गया। जिन लोगों पर जिम्मेदारी थी कि वो हिंसा को भड़कने न दे उन्हीं लोगों ने हिंसा भड़काने का काम किया है। सिलेब्रेटी जो जनता के बीच लोकप्रियता रखते हैं उनमें भी नागरिकता संशोधन कानून को लेकर असमंजस की स्थिति है। संशोधन मात्र तीन पेज का है जिस पर अध्ययन करने की जरूरत है। संशोधन तभी होता है जब लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बहुमत में सरकार हो, लेकिन भाजपा राज्यसभा में बहुमत में नहीं है। नागरिकता संशोधन कानून पर बाकी दलों ने राज्यसभा में बिल के पक्ष में मतदान किया है तभी पास हुआ है। पहले यह बिल था लेकिन 13 दिसबंर को माननीय महामहिम राष्ट्रपति महोदय से नोटिफाई होने के साथ ही कानून बन गया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक को पढ़ते हुये श्री तिवारी ने कहा कि नागरिक संशोधन अधिनियम 1955 में संशोधन कर अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी समुदाय के ऐसे आदमी को जो 31 दिसबंर 2014 या इससे पूर्व भारत में शरणार्थी बनकर आये, उन्हें नागरिकता देने के लिये हैं। यदि हमारा देश धर्म के आधार पर बांटा नहीं जाता तो आज इस कानून की जरूरत ही नहीं पड़ती। 2014 तक लोग जो आ गये है उनकी रक्षा करने के लिए नेहरू लियाकत पैक्ट बना जिसके तहत अपने अपने देश में अल्पसंख्यकों की रक्षा करेगें लेकिन पाकिस्तान ने अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं की जिसके कारण वहां उन्हें प्रताड़ित होना पड़ा। भारत के मुस्लमानों से इस कानून का कोई लेना देना नहीं है लेकिन विपक्ष उन्हें भड़काने का काम कर रहा है।

श्री तिवारी ने कहा कि संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असम, मेघालय, मिजोरम या त्रिपुरा के जनजाति क्षेत्र और बंगाल पूर्वी सीमान्त विनियम, 1873 के अधीन आने वाले क्षेत्रों पर नागरिका संशोधन लागू नहीं किया गया। नार्थ इस्ट में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनाई गई विभिन्न दलों ने इस पर राजनीति की। आपस में भारत के भाई बहनों को लड़ाया जा रहा है। नागरिक संशोधन कानून को लेकर सभी अफवाहों का भाजपा खंडन करती है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अलग-अलग पार्टियां जनता को डरा रही हैं। जिसका जन्म भारत में हुआ है उसकी नागरिकता को भारत में चुनौती कोई नहीं दे सकता है।

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